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इंसान को बेदार तो हो लेने दो.हर कौम पुकारेगी हमारे हैं हुसैन। दस मोहर्रम को ताजिए का जुलूस निकाला

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दस मोहर्रम को शहर में ताजिए का जुलूस निकाला गया। अजादारों ने जुलूस निकाल कर तुरबतें बिजनौर रोड स्थित कर्बला व लाइनपार स्थित कर्बला में दफन की। अजाखानों में मजलिसों का दौर चला तथा अजादारों ने गमे हुसैन में सीनाजनी कर मातम किया। सुबह छह बजे मुहल्ला गुजरी स्थित इमामबाड़ा नूरन से तुरबतों का जुलूस निकाला गया। नौबतखाना से होता हुआ यह जुलूस बिजनौर रोड स्थित कर्बला पहुंचा तथा वहां पर तुरबतों को दफन किया गया। जबकि आठ बजे मोहल्ला दानिशमंदान स्थित इमामबाड़े से भी तुरबतों का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस रेलवे लाईन पार कर दानिशमंदान की कर्बला में जाकर तुरबतों को दफन किया गया। उसके बाद मोहल्ला हक्कानीए सट्टी जाफरी काजीजादा पचदरा गुजरी काजी गली के इमामबाड़ों से भी तुरबतों का जुलूस निकाला गया। सभी तुरबतें बिजनौर रोड स्थित कर्बला में जाकर दफन हुए। मोहल्ला शफातपोता के अजाखाना से भी तुरबतों का जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में तुरबतों के साथ दुलदुल भी था।मुहल्ला शफातपोता के अजाखाना से भी तुरबतों का जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में तुरबतों के साथ दुलदुल भी था। यह जुलूस चाहगौरी से होता हुआ शफातपोता में मुकम्मल हुआ। दोपहर दो बजे से ताजियों के जुलूस निकलने शुरू हुए। लकड़ा, हक्कानी, सट्टी का ताजिया नौबतखाने के चौराहे से होता हुआ खारी कुआं पहुंचा। यहां से जाफरी और सद्दो के ताजिए जुलूस में शामिल हो गए। उसके बाद सभी मुहल्लों से ताजिये जुलूस में शामिल रहे। शाम को सभी ताजिये अपने इमामबाड़ों में शामिल हो गए। सबसे बड़ा ताजिया 34 फीट अजाखाना शफातपोता से निकाला गया। संचालन अंजुमने रजाकाराने हुसैनी ने किया। इस दौरान सदर हसन शुजा नकवी, लियाकत अमरोहवी, जिया ऐजाज, डॉ. सईदुल हसन, युसूफ नकवी, शरफ अली, मौलाना एहसान अख्तर, मौलाना मुस्तफा वसीम, मौलाना अफरोज मुजतबा, गुलाम सज्जाद, खुर्शीद हैदर जैदी, अख्तर अब्बास, डॉ. चंदन नकवी, मोहम्मद तकी, शाने मुजतबा, नजीर हैदर, हैदर जिया, डॉ. शारिक, नवेद असगर आदि रहे।

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